वसाका एक द्विबीज पत्री झाड़ीदार पौधा है जो लगभग 4-6 मीटर तक ऊंचा हो सकता है। इसकी पत्तियाँ लम्बी होती है | इसके फूल का रंग सफेद व पुष्पमंजरी गुच्छेदार होती है। इसके तने की लकड़ी नरम होती है जो गनपाउडर के लिए उपयोग की जाती है।
यह एक औषधिय पौधा है। इसकी पत्ती में वाइसिसिन नामक रासायनिक पदार्थ पाया जाता है। इसका उपयोग विभिन्न प्रकार की दवाइयों में किया जाता है। खांसी में इसके सेवन से आराम मिलता है।
आयुर्वेद के अनुसार वासा वात, पित्त और कफ को कम करने में बहुत काम आता है। इसके अलावा सिरदर्द, आँखों की बीमारी, पाइल्स, मूत्र रोग जैसे अनेक बीमारियों में बहुत फायदेमंद साबित होता है |
उष्ण प्रकृति का होने के कारण रक्तप्रदर, श्वेतप्रदर, एनीमिया, रक्तपित, त्वचा रोग, टाइफाइड या सन्निपात ज्वर आदि में औषधिये योग के साथ चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपयोग लिया जा सकता है |
https://ayurvedacareindia.com/2019/11/asthma-dyspnoea-asthma-is-chronic.html
Scientific Name – Adhathoda Vasika
सामान्य नाम – वासा, भिषङ्माता, वाजिदन्ता, आटरूषक, ताम्र, सिंहपर्ण, वैद्यमाता, अडूसा etc.
उपयोगी भाग – औषधियाँ इसकी पत्तियों एवं जड़ों से तैयार की जाती हैं।
इसकी निम्न जातियाँ पाई जाती है –
1. श्वेत वासा (Adhatoda zeylanica )- पुष्प सफेद रंग के,
2. रक्त वासा (Graptophyllum pictum ) – पुष्प गहरे लाल रंग के, इसकी पत्तियाँ शोथहर होती है।
3. कृष्ण वासा (Gendarussa vulgaris ) – इस पौधे का पूरा भाग बैंगनी रंग का होता है। यह वामक व रेचक होता है |
4. क्षुद्रवासा (Adhatoda beddomei ) – पुष्प सफेद रंग के होते हैं। कई जगहों पर वासा के स्थान पर इसका प्रयोग किया जाता है। इसके पत्ते, जड़ तथा फूल का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। पत्ते वमनरोधी तथा रक्तस्तम्भक होते है। इसका पौधा कफ करने वाला तथा बलकारक होता है।
Chemical Component –
– The leaves of Justicia adhatoda contains Phytochemicals such as alkaloids, tanins, saponins, phenolics and flavonoids.
– The most important is –
(1) Vasicine (Quinazoline alkaloid) –
It is an alkaloid, is one of the major components of the plant and is responsible for most of its antioxidant, anti-inflammatory, and bronchodilatory activities.
(a) Bromhexine – A derivative of vasicine. bromhexine (N-cyclo-N-methyl-(2-amino-3,5-dibromo-benzyl) amine hydrochloride) has been shown to possess mucus liquefying / expectorant activity.
(b) Ambroxol – A widely used secretolytic agent developed from vasicine, was shown to inhibit IgE-dependent mediator secretion from human MCs and basophils—the principal effectors of allergic inflammation.
Medicinal Properties –
– Antitussive (relieves cough), Expectorant, Bronchodilator
– Anti-bacterial, Anti-microbial, Anti-viral, Anti-tubercular
– Anti-allergic, Anti-inflammatory, Antioxidan, Anti-ulcer etc.
औषधीय उपयोग –
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श्वसन सम्बन्धी रोगो में – वासा फल में पाए जाने वाले वाइसिसिन यौगिक ब्रोंकोडाइलेटर हैं जो सांस फूलने की प्रक्रिया को कम करने में मदद करते हैं।
– वासा, हल्दी, गिलोय, पीपल, सोंठ, कालीमिर्च का 10-20 ml काढा दिन में 2 बार लेना |
– वासा के पञ्चाङ्ग को छाया में सुखाकर कपड़े में छानकर रोज 10 gm मात्रा लेना |
– ताजे पत्तों को सुखाकर व काले धतूरे के सूखे हुए पत्ते मिलाकर दोनों को पीसकर चूर्ण करके धूमवर्ती बनाकर धूम्रपान करने से श्वास सम्बन्धी तकलीफ में लाभ मिलता है।
– 5 ml वासा का रस + 2gm गिलोयसत्त् + 60 mg ताम्रभस्म + 2 gm बेलगिरी के चूर्ण के साथ प्रात-सायं प्रयोग करने से क्षय, कास तथा श्वास में लाभ मिलता है।
– वासा के पत्तों के 15-30 ml काढ़े में, 1gm छोटी पीपल का चूर्ण मिलाकर पिलाने से खांसी, सांस संबंधी समस्या और क्षय रोग में लाभ मिलता है |
– वासा चूर्ण 1 gm + सितोपलादि चूर्ण 2 gm + महासुदर्शन चूर्ण 2 gm + तुलसी चूर्ण (पवित्र तुलसी पाउडर) 1 gm + शहद 1 चम्मच
अस्थमा – 5 ml वासा के पत्तों का रस + 2 ml अदरक का रस
– 5 ml वासा पत्र स्वरस + शहद के साथ
– वासा चूर्ण 2 gm + पुष्करमूल 250 mg + त्रिकटु चूर्ण 250 mg + सितोपलादि चूर्ण 2 gm + शहद 1 चम्मच
खांसी – वासा की पत्तियों से बने काढ़े व शहद को साथ मिलाकर सेवन करना
– 5 ml वासा पत्र स्वरस + शहद के साथ
सामान्य जुकाम – वासा चूर्ण 1 gm + सितोपलादि चूर्ण 1 gm + त्रिकटु चूर्ण 125 mg + शहद 1 चम्मच
मसूड़ों से रक्तस्राव / मुँह के छाले में –
– वासा की पत्तियों का अच्छी तरह से पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को धीरे-धीरे मसूड़ों के ऊपर लगाएं। इस पेस्ट को एक सप्ताह तक नियमित रूप से इस्तेमाल करे |
– मुख में छाले हों तो वासा के 2-3 पत्तों को चबाकर उसके रस को चूसने से लाभ मिलता है |
– लकड़ी की दातौन करने से मुख के रोग दूर हो जाते हैं।
गले में दर्द – 1 चम्मच अडूसा के रस + दो चम्मच शहद के साथ |
पाचन – वासा की पत्तियों का 2 चम्मच पेस्ट + गर्म पानी + ½ चम्मच ताजा अदरक के रस के साथ |
आमाशय या ग्रहणी अल्सर – वासा चूर्ण 1 gm + मुलेठी 1 gm + शतावरी चूर्ण 500 mg + बंसलोचन 500 mg + मिश्री (चीनी) 1 gm
मासिक धर्म के कष्ट में – वासा पत्ते में 10 gm+ मूली व गाजर के बीज प्रत्येक 6 gm, तीनों को आधा लीटर पानी में पका लें। चतुर्थांश शेष रहने पर बने काढ़े का सेवन कुछ दिन तक करे |
NOTE – आयुर्वेद औषधियों की पहचान व आसानी से उपलब्ध नहीं होने पर आजकल सभी उत्पाद तैयार किये हुए टेबलेट, सिरप, अवलेह, ड्रॉप्स, चूर्ण पेटेंट रूप में दवा विक्रेता के पास आसानी से उपलब्ध हो जाते है जो की चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयोग लिए जा सकते है |
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