
गिलोय और इसके फायदे क्या है? –
गिलोय एक आयुर्वेदिक औषधि है। इसका वनस्पतिक नाम Tinospora Cordifolia है | इसे गुडूची,अमृता जैसे अनेक नामों से जाना जाता है। यह एक लता या बेल होती है | गिलोय जिस पेड़ को आधार बनाती है उसके गुण भी इसमें समाहित हो जाते हैं। नीम के पेड़ पर चढ़ी हुई गिलोय में नीम के गुण आ जाते हैं।
क्या गिलोय डेंगू के लिए अच्छा है?
क्या गिलोय प्लेटलेट्स बढ़ाती है? –
– गिलोय सभी प्रकार के बुखार में फायदेमंद होती है। विशेष रूप से डेंगू, चिकनगुनिया, स्वाइन फ्लू से बचाव, चिकित्सा में अति उपयोगी है, यह रक्त प्लेटों की संख्या को बढाता है |
– ज्वर के अतिरिक्त किसी भी लंबी व्याधि के बाद हुई दुर्बलता को मिटाने के लिए भी रसायन के तौर पर गिलोय प्रयुक्त होती है।
– गिलोय हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति को बढाती है। गिलोय अपनी anti-inflammatory और anti-arthritic गुणों के कारण गठिया रोग में भी फायदेमंद है |
– गिलोय साँस लेने में तकलीफों की बीमारी को भी कम करने में सहायता करता है. इसका उपयोग कफ़, सर्दी और टोंसिल जैसी बिमारियों के इलाज के लिए किया जाता है तथा सर्दी, खांसी, जुकाम में भी फायदेमंद है।
What is giloy called in English? – Tinospora Cordifolia
प्रयुक्त भागों – तना और पत्तियां
Chemical Component – alkaloids, glycosides, steroids, phenolics, aliphatic compounds, polysaccharides, leaves are rich in protein (11.2%), calcium and phosphorus.
औषधीय उपयोग –
https://ayurvedacareindia.com/2019/12/allergic-rhinitis-8005999426.html
बुखार – 4 चम्मच काढ़ा, जो तने के टुकड़ों से बना होता है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या को बढ़ाने के लिए गिलोय के तने व पत्र, पपीता की पत्तिया, जौ के रस को मिक्स करके जूस बनाकर पीना फायदेमंद है |
पीलिया – प्रतिदिन तना + गन्ने का रस 1 से 2 चम्मच।
ल्यूकोरिया – तने के टुकड़े का काढ़ा, एक सप्ताह के लिए दिन में दो बार 4 चम्मच।
त्वचा रोग – तने का रस + तिल का तेल लगाया जा सकता है।
अपच – 1 चम्मच तने का रस + अदरक का रस 2 से 3 बार।
जोड़ों दर्द – गिलोय का रस, अरंडी का तेल में मिलाकर लगाना | गिलोय सत्व को दूध में मिला कर पीना गठिया (Gout ) के उपचार में सहायक है। Rheumatoid arthritis के मामलों में इसका सेवन अदरक के साथ भी कर सकते हैं।
पाचन – आधा ग्राम गिलोय पाउडर + आमला या गुड़
गिलोय की चाय –
NOTE – आयुर्वेद औषधियों की पहचान व आसानी से उपलब्ध नहीं होने पर आजकल सभी उत्पाद तैयार किये हुए टेबलेट, सिरप, अवलेह, ड्रॉप्स, चूर्ण पेटेंट रूप में दवा विक्रेता के पास आसानी से उपलब्ध हो जाते है जो की चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उपयोग लिए जा सकते है |https://ayurvedacareindia.com/2019/11/asthma-dyspnoea-asthma-is-chronic.html
