

गर्भाशय फाइब्रॉएड (रसौली) Uterine Fibroid
महिलाओं में गर्भाशय से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। किसी को अनियमित पीरियड्स की शिकायत है, तो किसी को अत्यधिक रक्तस्राव हो रहा है। वहीं, कुछ महिलाएं ऐसी हैं, जो गर्भाशय फाइब्रॉएड (रसौली) से जूझ रही हैं। हालांकि, इसका उपचार आसान है, लेकिन अनदेखी करने पर बांझपन जैसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
गर्भाशय फाइब्रॉएड, गर्भाशय की दीवारों पर पनपने वाला एक प्रकार का ट्यूमर होता है।फाइब्रॉएड एक या एक से ज्यादा ट्यूमर के तौर पर विकसित होता है।
Uterine fibroids, which are also called leiomyomas or myomas, are benign (noncancerous) muscular growths within the walls of the uterus.
गर्भाशय फाइब्रॉएड (रसौली) के कारण –फाइब्रॉएड होने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिक तौर पर किसी एक कारण की निश्चित तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। इनमें से प्रमुख कारण-
– आयु – फाइब्रॉएड प्रजनन काल के दौरान विकसित होते हैं। खासतौर पर 30 की आयु से लेकर 40 की आयु के बीच या फिर रजनोवृत्ति शुरू होने तक इसके होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है। माना जाता है कि रजनोवृत्ति शुरू होने के बाद ये कम होने लगते हैं।
– मोटापा – अगर किसी महिला का वजन अधिक है, तो उसमें फाइब्रॉएड होने की आशंका अन्य महिलाओं के मुकाबले तीन गुना तक ज्यादा होती है।
– असंतुलित भोजन – अगर आप रेड मीट या फिर जंक फूड ज्यादा खाती हैं और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन कम करती हैं, तो आप इस बीमारी की चपेट में आ सकती हैं।
– हार्मोंस – शरीर में एस्ट्रोजन व प्रोजेस्ट्रोन हार्मोंस की मात्रा अधिक होने पर भी गर्भाशय फाइब्रॉएड हो सकता है।
– आनुवंशिक – अगर परिवार में किसी महिला को यह समस्या रही है, तो आशंका है कि आगे की पीढ़ी में से किसी अन्य को इसका सामना करना पड़ सकता है।
Cause –
– It remains unclear exactly what causes fibroids. They may be related to estrogen and progesterone high levels in the age of 30 to 50.
– There is also red meat, alcohol, and caffeine could increase the risk of fibroids, and an increased intake of fruit and vegetables might reduce it.
– Being overweight or obese increases the risk of fibroid.
You may be at higher risk for fibroids if you are –
– Have a family history of fibroids
– Began menstruation before the age of 10
– Use certain kinds of birth control
– Have a poor diet
– Consume alcohol
गर्भाशय फाइब्रॉएड के लक्षण – फाइब्रॉएड से ग्रस्त कुछ महिलाओं में इस तरह के परिवर्तन दिखाई दे सकते हैं-
– अत्यधिक रक्तस्राव और पीरियड्स के दौरान अहसनीय दर्द होना।
– एनीमिया यानी शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की कमी आना।
– पेट के निचले हिस्से यानी पेल्विक एरिया में भारीपन महसूस होना।
– पेट के निचले हिस्से का फूलना।
– बार-बार पेशाब आने का अहसास होना।
– यौन संबंध बनाते समय दर्द होना।
– कमर के निचले हिस्से में दर्द होना।
– प्रजनन क्षमता में कमी यानी बांझपन, बार-बार गर्भपात होना, गर्भावस्था के दौरान सी-सेक्शन का खतरा छह गुना तक बढ़ना।
Symptoms – These may include –
– heavy, painful periods, also known as menorrhagia
– anemia from heavy periods
– lower backache or leg pain
– constipation
– discomfort in the lower abdomen, especially in the case of large fibroids
– frequent urination
– pain during intercourse, known as dyspareunia
Other possible symptoms include –
– labor problems
– pregnancy problems
– fertility problems
– repeated miscarriages
Note –
– If fibroids are large, there may also be weight gain and swelling in the lower abdomen.
– Once a fibroid develops, it can continue to grow until menopause. As estrogen levels fall after menopause, the fibroid will usually shrink.
Fibroid Types – There are four types of fibroid –
1. Intramural – This is the most common type. An intramural fibroid is embedded in the muscular wall of the womb.
2. Subserosal fibroids – These extend beyond the wall of the womb and grow within the surrounding outer uterine tissue layer. They can develop into pedunculated fibroids, where the fibroid has a stalk and can become quite large.
3. Submucosal fibroids – This type can push into the cavity of the womb. It is usually found in the muscle beneath the inner lining of the wall.
4. Cervical fibroids – Cervical fibroids take root in the neck of the womb, known as the cervix.
Diagnosis –
– Ultrasound images
– MRI
– Hysteroscopy
– laproscopy
Treatment –
At-home care, diet changes, and natural remedies may help treat fibroids and relieve symptoms. The lifestyle changes below are also important in the prevention of fibroids.
– Weight loss
– Nutritional Diet
– Avoid fast food or others like – white rice, pasta, and flour, soda, and other sugary drinks, corn syrup, boxed cereals, baked goods (cakes, cookies, doughnuts), potato chips, cracks.
प्राकर्तिक चिकित्सा –
कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिये जो फाइब्रॉयड के आकार को सिकोड़ दे। इन आहारों के नियमित सेवन से लीवर अत्यधिक इस्ट्रोजेन को शरीर से बाहर निकालेगा जिससे हार्मोन बैलेंस होगा और फाइब्रॉयड समाप्त होगा।
– लहसुन – लहसुन में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कि ट्यूमर को बढ़ने से रोकते हैं।
– गुग्गुल – गर्भाशय से जुड़ें रोगों के लिए गुग्गुल का सेवन बहुत फायदेमंद होता है।
– अदरक– अदरक की जड़ गर्भाशय में रक्त के प्रवाह और परिसंचरण को बढ़ावा देने में इस्तेमाल किया जाता है। बढा हुआ सर्कुलेशन गर्भाशय, अंडाशय या फैलोपियन ट्यूब की सूजन को कम करने में मदद करता है
– प्याज – प्याज में सेलेनियम होता है जो कि मासपेशियों को राहत प्रदान करता है। इसका तेज एंटी–इंफ्लमेट्री गुण फाइब्रॉयड के साइज को सिकोड़ देता है।
– हल्दी – हल्दी सूजन को कम करती है।
– दालें और बींस – राजमा, बींस, मटर आदि खाने से शरीर को एक तरह का कैमिकल जिसे फोटोइस्ट्रोजेन कहते हैं, मिलता है। यह फाइब्रॉयड को सिकोड़ता है।
– सिट्रस फल – सिट्रस फलों में विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट होता है। यह शरीर को अंदर से साफ करता है और यूट्रस में फाइब्रॉयड को बनने से रोकता है।
– बादाम – इसमें ओमेगा ३ फैटी एसिड होता है जो की यूटेरस की लाइनिंग ठीक करता है , जिससे फ़िब्रोइड के होने की सम्भावना काम रहती है।
– सेब का सिरका – इसके सेवन से शरीर में जमा हो चुके विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। साथ ही वजन कम करने में मदद मिलती है
– आंवला – आंवले में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं।
– ग्रीन टी – ग्रीन टी में एपिगलोकेटेशिन गलेट नामक पॉलिफेनोल एजेंट पाया जाता है, जो फाइब्रॉएड पर कारगर तरीके से काम करता है। मुख्य रूप से पॉलिफेनोल हरी पत्तेदार सब्जियों और फलों में पाया जाता है।
– साल्मन मछली – साल्मन मछली को ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन–डी का अच्छा स्रोत माना गया है। साल्मन मछली में फिश ऑयल भी होता है, जिसकी मदद से शरीर में प्रोस्टाग्लैंडीन ई3 (PGE3) का निर्माण होता है। यह यौगिक एंटीइंफ्लेमेटरी की तरह काम करता है, जो फाइब्रॉएड से होने वाले दर्द को कम करने में सक्षम है। साथ ही साल्मन मछली शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को नियंत्रित करती है
– ज्यादा से ज्यादा मात्रा में पानी पीना चाहिए ।
आयुर्वेद प्राचीन भारतीय चिकित्सा व्यवस्था है, जिसमें प्रकृति में मौजूदा जड़ी बूटियों का उपयोग करते हैं। आयुर्वेद मानव शरीर पर अद्भुत परिणाम लाने के लिए प्राकृतिक जड़ी बूटियों के निहित शक्ति का उपयोग करता है।
– चेस्टबेरी – चेस्टबेरी को दक्षिणी यूरोप और भूमध्य क्षेत्रों में पाया जाने वाला हर्ब है। यह हार्मोन संतुलन, एस्ट्रोजन के कम स्तर बनाए रखने और सूजन को कम करने का एक उत्कृष्ट हर्बल उपाय है।
– सिंहपर्णी – यह अधिक हार्मोंन बनने से गर्भाशय फाइब्रॉएड की समस्या होती है। यह लिवर को विषाक्त पदार्थों से मुक्त कर शरीर से अतिरिक्त एस्ट्रोजन को साफ करता है।
– मिल्क थीस्ल – यह आयुर्वेदिक उपचार मेटाबॉल्जिम की मदद कर अतिरिक्त एस्ट्रोजन से छुटकारा पाने में मदद करता है। एस्ट्रोजन प्रजनन हार्मोंन है, जो योगदान वृद्धि कारकों को जारी करने के लिए कोशिकाओं को उत्तेजित करता है, और इससे फाइब्रॉइड में वृद्धि होती है।
– बरडॉक रूट – बरडॉक रक्त को शुद्ध करने वाली जड़ी-बूटी है। यह लिवर का समर्थन कर अतिरिक्त एस्ट्रोजन को डिटॉक्स कर गर्भाशय फाइब्रॉएड को कम करने में मदद करता है। इसमें मौजूद मूत्रवर्धक गुण के कारण यह शरीर को डिटॉक्स कर सूजन को कम करने में मदद करता है।
– गोल्डनसील रूट – यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी में एंटीबॉयोटिक, एंटी मॉइक्रोबिल और एंटी-इंफ्लेमेंटरी गुणों से भरपूर होती है। गोल्डनसील टिश्यु की वृद्धि से होने वाले दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। इस जडी़-बूटी में बहुत अधिक मात्रा में अल्कलॉइड बेर्बेराइन नामक तत्व पाया जाता है, जो गर्भाश्य के टिश्यु को टोन कर फाइब्रॉएड के विकास को रोकता है।
आयुर्वेदिक औषधियाँ हर्बल और प्राकृतिक तरीके से हार्मोंन में संतुलन बनाकर ओवरियन के कामकाज में सुधार करती है। ओवरियन का काम समन्वय बनाने और गर्भाशय के स्वास्थ्य को बनाए रखना होता है। इस तरह से गर्भाशय में फॉइब्राइड की संरचना को रोका जाता ह।
Note – आयुर्वेदिक उपचार के लिए या तो हमारे सेंटर पर संपर्क कर सकते है या फिर निचे दिए लिंक से ऑनलाइन आर्डर कर सकते है |
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गर्भाशय असामान्य ऊतक
(Endometrial Polyps in Uterus)
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एंडोमेट्रियोसिस गर्भाशय में होने वाली समस्या हैं। इस समस्या के होने पर गर्भ (एंडोमेट्रियम) को ढकने वाली टिश्यूज ओवरीज या गर्भाशय के आसपास जैसी असामान्य जगहों पर विकसित होने लगती हैं।
एंडोमेट्रोसिस माहवारी के दौरान पीड़ा का कारण बनता है। असामान्य रूप से बढ़ा एंडोमेट्रियल टिश्यु अपना कार्य सामान्य तौर पर ही करता है और हर पीरियड के बाद इन टिश्यु की परत टूट जाती है। इन्हीं परतों के टूटने से ब्लीडिंग होती है। क्योंकि गर्भाशय के अलावा अन्य अंगो में इस परत के टूटने से निकला ब्लड बाहर नहीं निकल पाता इसलिए उस स्थान पर घाव के साथ-साथ परत के कारण अंग जुड़ने लगते है। यह स्थिति बहुत दर्द कारक होती है और इसमें ब्लीडिंग बहुत ज्यादा होती है। इसके अलावा एंडोमेट्रियोसिस के अंडाशय तक फैलने से उस हिस्से पर सिस्ट भी बन जाते हैं। कभी-कभी, इससे प्रजनन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है और यह बच्चे को गर्भधारण करने के दौरान समस्याएं पैदा कर सकती है।
Endometrial polyps are abnormal tissue growths within the endometrium, the inner lining of the uterus.
These polyps are usually noncancerous (benign), although some can be cancerous or can eventually turn into cancer (precancerous polyps).
Uterine polyps most commonly occur in women who are going through or have completed menopause, although younger women can get them, too.
Causes –
Hormonal factors appear to play a role. Uterine polyps are estrogen-sensitive, meaning they grow in response to circulating estrogen.
एंडोमेट्रोसिस का कारण –
– रेट्रोग्रेड मासिक धर्म – इस स्थिति में, मासिक धर्म रक्त जिसमें एंडोमेट्रियल कोशिकाएं होती हैं। आमतौर पर शरीर से बाहर निकलने के बजाय फैलोपियन ट्यूबों के माध्यम से श्रोणि गुहा में वापस आती हैं। ये एंडोमेट्रियल कोशिकाएं श्रोणि अंगों और श्रोणि दीवारों से चिपके रहते हैं जहां वे मासिक धर्म चक्र के दौरान मोटा होना शुरू कर देते हैं।
– पेरिटोनियल कोशिकाओं को बदलना – पेरोटोनियल कोशिकाओं के परिवर्तन के कारण एंडोमेट्रोसिस का कारण बन सकता है।
– कोशिकाओं के भ्रूण परिवर्तन – एस्ट्रोजेन जैसे हार्मोन शुरुआती चरणों में भ्रूण कोशिकाओं को बदल सकते हैं।
सर्जिकल निशान इम्प्लांटेशन- सी-सेक्शन या हिस्टरेक्टॉमी जैसी शल्य चिकित्सा के बाद, एंडोमेट्रियल कोशिकाएं खुद को सर्जिकल चीरा से जोड़ सकती हैं।
– एंडोमेट्रियल कोशिका परिवहन – ऊतक तरल पदार्थ (लिम्फैटिक) या रक्त वाहिकाओं एंडोमेट्रियल कोशिकाओं को अन्य शरीर के अंगों में ले जा सकते हैं।
एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण –
– इसके प्राथमिक लक्षणों में पीरियड्स के दौरान तेज पेल्विक दर्द शामिल है।
– पीरियड्स से पहले मांसपेशियों में खिचाव और दर्द शुरू हो सकता है, जो पीरियड्स के बाद भी बना रहता है और शरीर के निचले हिस्से को पूरी तरह जकड़ लेता है। ऐसी स्थिति में, मल या मूत्र त्याग में भी समस्या आती है।
– इंफर्टिलिटी की जांच के दौरान, कई महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस का पता चलता है।
– सेक्स संबंध बनाने के दौरान, या बाद में दर्द होना एंडोमेट्रियोसिस में आम बात है।
– बहुत अधिक ब्लीडिंग वाले पीरियड्स या 2 पीरियड्स के बीच ब्लीडिंग होना।
– इसके अलावा थकान, कब्ज़, चक्कर आना और मितली खासकर पीरियड्स के दौरान, इस समस्या के अन्य लक्षण हैं।
Symptoms – Signs and symptoms of uterine polyps include:
– Irregular menstrual bleeding
– Bleeding between menstrual periods
– Excessively heavy menstrual periods
– Vaginal bleeding after menopause
– Infertility
– Abnormal vaginal discharge
Risk factors – Risk factors for developing uterine polyps include –
– Being perimenopausal or postmenopausal
– Having high blood pressure (hypertension)
– Being obese
– Taking tamoxifen, drug therapy for breast cancer
Diagnosis –
– Ultrasound images
– MRI
– Hysteroscopy
– laproscopy
Treatment – possible by Ayurveda treatment.
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ओवेरियन सिस्ट (Ovarian-cyst)
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ओवेरियन सिस्ट (Ovarian cyst in hindi) एक तरल पदार्थ से भरी हुई थैली है जो महिलाओं के एक या दोनों अण्डाशयों (ovaries) में बन सकता है | यह एक आम बीमारी है जो किसी भी महिला को हो सकती है और ज़्यादातर हानिकारक नहीं होता |
Ovarian cysts are fluid-filled sacs that may develop one or both of a woman’s ovaries. The ovaries are responsible for producing female reproductive hormones as well as releasing an egg each month during ovulation. The most common types of cysts form during ovulation when one of the follicles on the ovaries responsible for releasing an egg fails to open.
Besides modern allopathic medicines, a wide range of ayurvedic medicine cures for ovarian cyst are available to treat this condition naturally and safely.
ओवेरियन सिस्ट के कारण –
ओवेरियन सिस्ट (Ovarian-cyst) के कई कारण हो सकते हैं जैसे –
– आनुवंशिक प्रभाव,
– मोटापा,
– कम उम्र में पीरियड की शुरुआत,
– गर्भधारण में अक्षमता,
– हॉर्मोन्स का असंतुलन
Most ovarian cysts develop as a result of your menstrual cycle (functional cysts). Other types of cysts are much less common.
ओवेरियन सिस्ट ( Ovarian cyst ) के लक्षण –
– श्रोणि में या पेट के निचले हिस्से में रुक-रुक कर दर्द होना
– अनीयमित माहवारी (irregular periods) होना या माहवारी के समय ज़्यादा रक्त निकलना (heavy periods – menorrhagia)
– पेट का फूलना
– भारीपन महसूस होना,
– व्यायाम या सहवास के बाद पेल्विक क्षेत्र में दर्द महसूस होना,
– जी मिचलाना |
Most cysts don’t cause symptoms. However, a large ovarian cyst can cause –
– Pelvic pain — a dull or sharp ache in the lower abdomen on the side of the cyst
– Fullness or heaviness in your abdomen
– Bloating
– Pain during intercourse
– Frequent and/or difficult urination
– Sudden, sharp pain due to a ruptured cyst.
Types of Cyst –
A. Functional cysts – Your ovaries normally grow cyst-like structures called follicles each month. Follicles produce the hormones estrogen and progesterone and release an egg when you ovulate.
If a normal monthly follicle keeps growing, it’s known as a functional cyst. There are two types of functional cysts:
a. Follicular cyst – A follicular cyst begins when the follicle doesn’t rupture or release its egg but continues to grow.
b. Corpus luteum cyst – When a follicle releases its egg, it begins producing estrogen and progesterone for conception. This follicle is now called the corpus luteum. Sometimes, fluid accumulates inside the follicle, causing the corpus luteum to grow into a cyst.
Functional cysts are usually harmless, rarely cause pain, and often disappear on their own within two or three menstrual cycles.
B. Dermoid cysts – Also called teratomas, these can contain tissue, such as hair, skin or teeth because they form from embryonic cells. They’re rarely cancerous.
C. Cystadenomas – These develop on the surface of an ovary and might be filled with a watery or mucous material.
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D. Endometriomas – These develop as a result of a condition in which uterine endometrial cells grow outside your uterus (endometriosis). Some of the tissue can attach to your ovary and form a growth.
Complications – frequent complications associated with ovarian cysts include:
1. Ovarian torsion – Cysts that enlarge can cause the ovary to move, increasing the chance of painful twisting of your ovary (ovarian torsion). Symptoms can include an abrupt onset of severe pelvic pain, nausea, and vomiting. Ovarian torsion can also decrease or stop blood flow to the ovaries.
2. Rupture – A cyst that ruptures can cause severe pain and internal bleeding. The larger the cyst, the greater the risk of rupture. Vigorous activity that affects the pelvis, such as vaginal intercourse, also increases the risk.
Investigations –
– Ultrasound images
– MRI
– Hysteroscopy
– laparoscopy
उपचार –
घरेलु सुझाव –
कैस्टर ऑयल पैक – कैस्टर ऑयल शरीर से अतिरिक्त टिशू और टॉक्सिन्स को अलग कर देता है। ये लिम्पेटिक और सर्कुलेटरी सिस्टम को भी बढ़ावा देता है जिससे ओवेरियन सिस्ट की समस्या दूर होती है।
एप्पल साइडर विनेगर – पोटेशियम की कमी से होने वाले ओवेरियन सिस्ट को खत्म करने में एप्पल साइडर विनेगर काफी मददगार साबित हो सकता है। इसमें उच्च मात्रा में पोटेशियम मौजूद होता है।
चुकन्दर का प्रयोग – चुकन्दर में बेटासाइनिन होता है जो लिवर की टॉक्सिन्स को साफ करने की क्षमता बढ़ाता है।
अदरक का रस – अदरक में सूजन दूर करने वाले गुण होते हैं, साथ ही इससे दर्द में भी बहुत जल्दी आराम मिलता है। अदरक शरीर में गर्माहट पैदा करता है और रूके हुए मासिकधर्म को भी शुरू कर देता है।
अलसी के बीज – अलसी के बीज से शरीर में एस्ट्रोजन का संतुलन बना रहता है। इससे सिस्ट कम होने में मदद मिलती है। अलसी के बीज में फाइबर अधिक होता है जिससे शरीर में से नुकसानदायक टॉक्सिन्स, कोलेस्ट्रॉल और अन्य लिवर को नुकसान करने वाले तत्व बाहर निकल जाते हैं।
बादाम – बादाम में मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है जिससे ओवेरियन सिस्ट के दौरान होने वाले दर्द से राहत मिलती है। इसके लिए भुने हुए बादाम खाएं।
हीटिंग पैड – महिलाएं अक्सर हीटिंग पैड का इस्तेमाल करने से बचती हैं। लेकिन अगर ओवरी में सिस्ट है तो हीटिंग पैड कमाल का असर करता है। इससे मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं और दर्द कम हो जाता है।
कैमोमाइल चाय – अगर आप एक कप कैमोमाइल चाय पीती हैं तो आपको ओवरी में होने वाली सिस्ट में उठने वाले दर्द से राहत मिल सकती है।
शरीर को मूव कराएं – अगर आपको ओवरी में सिस्ट है तो रोजाना व्यायाम या योग करें। इससे आपको दर्द में राहत मिलेगी और वॉर्मअप होने की वजह से लम्बे समय तक के लिए राहत होगी।
आयुर्वेदिक औषधियाँ हर्बल और प्राकृतिक तरीके से हार्मोंन में संतुलन बनाकर ओवरियन के कामकाज में सुधार करती है। ओवरियनका काम समन्वय बनाने और गर्भाशय के स्वास्थ्य को बनाए रखना होता है। इस तरह से ओवेरियन सिस्ट की संरचना को रोका जाता है।
