Joint Pain- Osteo Arthritis/ Rheumatoid Arthritis/ Gout/ Ankle Sprain- Ayurveda Treatment

जोड़ दर्द (Joint Pain)
         

               आयुर्वेद के नियमों का उचित प्रयोग करने, सही भोजन और जीवनशैली रखने से जोड़ों के दर्द से छुटकारा पाना संभव है। जोड़ों के दर्द को रोकने, सही देखभाल और उपचार के लिए आयुर्वेद सर्वश्रेष्ठ उपचार पद्धतियों में से एक है। यदि आपको, आपके परिवार या दोस्तों में किसी को जोड़ों के दर्द की समस्या है, तो आयुर्वेद का रुख करने के लिए यह सही समय है।

आयुर्वेद अवधारणा
     – जोड़ों की तकलीफों के समाधान, रख-रखाव और उपचार के लिए आयुर्वेद की अपनी अवधारणा और नैदानिक सोच है।
     – जोड़ अस्थि व मज्जा धातु से मिलकर बनते हैं। जोड़ों को बांध कर रखने वाले लिगामेंट रक्त धातु से बने होते हैं, जो पित्त दोष के अधीन होती है। श्लेषक कफ, जोड़ों को चिकनापन प्रदान करता है, जबकि जोड़ों की गति के लिए वात का महत्व है।
     – जोड़ों में इन सभी दोषों का बहुत जटिल संतुलन होता है और जरा भी असंतुलित होने पर जोड़ों की संरचना व कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है, जिसका परिणाम होता है- जोड़ों में दर्द।

                     आयुर्वेद के अनुसार खाए गए भोजन को जठराग्नि पचाती है। जब जठराग्नि मंद पड़ जाती है, तो पाचन गड़बड़ा जाता है। खराब पाचन के कारण शरीर में आम एकत्रित होता है और जब ये विषाक्त पदार्थ यानी आम जोड़ों में इकट्ठा होने लगता है, तो वात के मार्ग को अवरुद्ध करता है, जिसके कारण जोड़ों का दर्द पैदा होता है।

जोड़ों में दर्द के लक्षण –

            – जोड़ों को मोड़ने में परेशानी होन
            – जोड़ों का लाल होना
            – जोड़ों में खिंचाव महसूस होना
            – जोड़ों पर कठोरता होना
            – चलने- फिरने में दिक्कत होना
            – जोड़ों में अकड़न आना
            – जोड़ों में सूजन और दर्द
                   आयुर्वेद के अनुसार खाए गए भोजन को जठराग्नि पचाती है। जब जठराग्नि मंद पड़ जाती है, तो पाचन गड़बड़ा जाता है। खराब पाचन के कारण शरीर में आम एकत्रित होता है और जब ये विषाक्त पदार्थ यानी आम जोड़ों में इकट्ठा होने लगता है, तो वात के मार्ग को अवरुद्ध करता है, जिसके कारण जोड़ों का दर्द पैदा होता है।

Possible Conditions

1. Arthritis – Arthritis is an inflammation of the joints.
Two types

 – Osteoarthritis (OA),
 – Rheumatoid arthritis (RA)

Osteoarthritis-(संधिगत वात )

आयुर्वेदानुसार-
           वात प्रकोपक आहार के अत्यधिक सेवन से वातदोष का प्रकोप होकर संधियों में स्थान संश्रय होकर संधि, स्नायु , कण्डरा की विकृति से संधिगत वात रोग उत्पन होता है | इससे संधियों में भारीपन, शोथ , आकुंचन प्रसारण में कठिनाई , संधि विकृति पैदा होती है

चिकित्सा सिद्धांत –

     – दाह कर्म,
     – स्नेहन कर्म ,
     – उपनाह चिकित्सा

 NOTE –  आयुर्वेदिक उपचार के लिए या तो हमारे सेंटर पर संपर्क कर सकते है या फिर निचे दिए लिंक से ऑनलाइन आर्डर कर सकते है |
 www.ayurvedcareindia.com

                An infection or injury to the joints can exacerbate this natural breakdown of cartilage tissue. common symptoms are Joint pain, tenderness, Stiffness, Swelling, Redness, Range of Motion Decrease, etc.

    Examination- Physical examination, x-ray, MRI, CT- Scans.

    T/t- Heating pads and ice packs, Mobility Assistance devices, Ayurvedic oil massage.

Rheumatoid Arthritis ( आमवात ) –

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आयुर्वेदानुसार-  विरुद्ध आहार विहार के सेवन से अग्निमांद्य होकर आम दोष की उत्पति होती है व आम दोष वात दोष के साथ मिलकर श्लेष्म स्थान जैसे संधि, हृदय, आमास्य में अवस्थान एवं सामूर्छना से सार्वदैहिक लक्षण गौरव, दौर्बल्ये एवं स्थानीय संधिगत लक्षण जैसे सूजन,वृश्चिकवत शूल आदि की उत्पति होती है

चिकित्सा सिद्धांत –
           – लंघन

           – स्वेदन – नवीन में रुक्ष बालुका स्वेद / जीर्ण में उपनाह

           – तिक्त व कटु रस औषध प्रयोग

           – दीपन पाचन औषध

           – विरेचन /कोष्ठ शुद्धि

           – बस्ति चिकित्सा

           – एरंड ऑयल प्रयोग

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           RA is an Autoimmune Disorder. RA symptoms are Tiredness, Loss of appetite, Fever, and Anemic (Red Blood Cell Decreases). RA can cause joint deformity if left untreated.

   Investigations- Rheumatoid Factor, Anti CCP (anti-cyclic citrullinated peptide), ANA (Antinuclear Antibody), C-reactive protein, ESR rate.

   T/t by Lifestyle changes – Weight loss, Healthy diet, Antioxidants, Inflammation reducing food, Gluten-free diet, Regular Exercise, Swimming,

2.Gout – ( वात रक्त )
                         

 आयुर्वेदानुसार –
       मिथ्या आहार विहार के सेवन से वात व रक्त की दुस्टि होकर दूषित रक्त पादमूल में संचय होकर त्वचा और मांस में या संधियों में संश्रय करके वातरक्त उत्पन करता है| इससे आखोर्विश के सामान संधियों में शूल, कृष्णता , वेदना आदि उत्पन हो जाते है | यह छोटी संधियों से शुरू होता है |

चिकित्सा –

–  बहि: परिमार्जन – आलेप, अभ्यंग , परिसेक, उपनाह
– अन्तः परिमार्जन – विरेचन , स्नेहपान , अस्थापन बस्ति

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         Gout is a disorder of Purine manifested by following features occurring singly or in combination. it may be due to Hyperuricaemia of metabolic origin (10%), or Hyperuricaemia of Renal origin (90%).

Symptoms –

      –  The first attack of acute Gouty Arthritis is on the metatarsophalangeal joint of the great toe in 70%.
      –  Joint swelling, Redness, shiny overlying skin, and dilated veins.
      –  maybe fever, leucocytosis, raised ESR, and Urate level.
      –  Blood test- TLC, DLC, HB%, ESR.
      –  Biochemical test- Serum Uric Acid, S. Creatinine
      –  X-ray

3. Ankle Sprain and Strains – ( वातकंटक )

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आयुर्वेदानुसार –
       अधिक श्रम या मोच आदि के कारण प्रकुपित वात गुल्फ में वेदना उत्पन करती है इससे वातकंटक कहते है |

चिकित्सा – 

    –  पुनः पुनः रक्तमोक्षण ,

    –  एरंड तेल पान,

    – अग्निदग्द |

      Overstretching or tearing of soft tissues in and around your joints.
  Causes- Athletic activities or exercise, including running or jogging, accidents, such as falling or slipping, lifting heavy objects overexerting yourself, sitting or standing in an awkward position prolonged repetitive motion.
  T/t- Rest, Ice, Compression, Elevation.

4. Synovitis of Knee Joint ( क्रोष्टुशीर्ष ) –

                                   

             आयुर्वेदानुसार वात एवं रक्त दोष प्रकुपित होकर जानु संधि स्थित होकर क्रोष्टुशीर्ष रोग उत्पन करते है व यह केवल जानु संधि में होता है जिससे जानु संधि श्रृंगाल के सिर के सामान हो जाती है

चिकित्सा –

      – वातरक्त नाशक चिकित्सा
      – अभ्यंग
      – रुक्ष स्वेद

          –  Synovitis is the medical term for inflammation of the synovial membrane. This membrane lines joints that possess cavities, known as synovial joints. The condition is usually painful, particularly when the joint is moved. The joint usually swells due to synovial fluid collection. synovitis may occur with arthritis called sino-arthritis.
Synovitis causes joint tenderness or pain, swelling, and hard lumps, called nodules.

5. Others –
.   – CFS (Chronic Fatigue Syndrome)
    – Fibromyalgia
    – Bursitis
    – Ankylosing Spondylitis
    – Psoriatic Arthritis
    – Bone Infection
    – Tenosynovitis
    – Fracture
    – Dislocation
    – Juvenile Idiopathic Arthritis
    – Tendinitis
    – Polymyalgia Rheumatica
    – Swine Flu (H1N1)
    – Reactive Arthritis
    – Systemic lupus Erythematosus(SLE)
    – Baker’s(Popliteal) cyst
    – Paget’s disease of bone etc.

            आयुर्वेद प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है जिससे रोग कम से कम समय में व जड़ से खत्म होने के साथ ही दवाओं का किसी तरह का दुष्प्रभाव नहीं होता है | अतः उपरोक्त रोग के उपचार हेतु आयुर्वेद चिकित्सक की सलाह प्राप्त करे |

 NOTE –  आयुर्वेदिक उपचार के लिए या तो हमारे सेंटर पर संपर्क कर सकते है या फिर निचे दिए लिंक से ऑनलाइन आर्डर कर सकते है |
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आयुर्वेदिक उपचार के लिए संपर्क करे –

आयुर्वेदकेयर इंडिया , खेमी सती रोड़, झुंझुनू डॉ. राकेश सैनी, Mob.- 8005999426, 9460935150 

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