Diabetes: Symptoms, Prevention, and early diagnosis, Ayurveda Treatment

       मधुमेह ( प्रमेह )
(  Diabetes Mellitus )
आजकल के इस भागदौड़ भरे युग में अनियमित जीवनशैली के चलते जो बीमारी सर्वाधिक लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है वह है मधुमेह।यह ऐसी बीमारी है जो एक बार किसी के शरीर को पकड़ ले तो उसे फिर जीवन भर छोड़ती नहीं। इस बीमारी का जो सबसे बुरा पक्ष है वह यह है कि यह शरीर में अन्य कई बीमारियों को भी निमंत्रण देती है। मधुमेह रोगियों को आंखों में दिक्कत, किडनी और लीवर की बीमारी, शरीर में कंपकपी, हृदय रोग, त्वचागत रोग जैसे मुश्किल से ठीक होने वाले व्रण, और पैरों में दिक्कत होना आम है।
Diabetes mellitus is a chronic disease caused by inherited or acquired deficiency in the production of insulin by the pancreas, or by the ineffectiveness of the insulin produced. Such a deficiency results in increased concentrations of glucose in the blood, which in turn damage many of the body’s systems, in particular, the blood vessels and nerves.
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कारण- शरीर में पेंक्रियाज ग्रंथी से तरह-तरह के हार्मोंस निकलते हैं, इन्हीं में से हैं  इंसुलिन और ग्लुकेगॉन  इंसुलिन हमारे शरीर के लिए बहुत उपयोगी है। इंसुलिन के जरिए ही हमारे रक्त में, हमारी कोशिकाओं को शुगर मिलती है, यानी इंसुलिन शरीर के अन्य भागों में शुगर पहुंचाने का काम करता है। इंसुलिन द्वारा पहुंचाई गई शुगर से ही कोशिकाओं या सेल्स को एनर्जी मिलती है।जब शरीर में इंसुलिन ठीक से न बने या शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के लिए ठीक से प्रतिक्रिया न दें। जिन मरीजों का ब्लड शुगर सामान्य से अधिक होता है वे अक्सर पॉलीयूरिया (बार बार पेशाब आना) से परेशान रहते हैं। उन्हें प्यास (पॉलीडिप्सिया) और भूख (पॉलिफेजिया) ज्यादा लगती है।
 

मधुमेह के कारण –

1. जीवनशैली – गतिहीन जीवनशैली, अधिक मात्रा में जंक फूड, फिजी पेय पदार्थो का सेवन और खाने-पीने की गलत आदतें मधुमेह का कारण बन सकती हैं। घंटों तक लगातार बैठे रहने से भी मधुमेह की संभावना बढ़ती है।इसके अलावा व्यायाम की कमी भी डायबिटीज को निमंत्रण देती है।


2. सामान्य से अधिक वजन, मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता – अगर व्यक्ति शारीरिक रूप से ज्यादा सक्रिय न हो अथवा मोटापे का शिकार हो, उसका वजन सामान्य से अधिक हो तो भी मधुमेह की सम्भावना बढ़ जाती है। ज्यादा वजन इंसुलिन के निर्माण में बाधा पैदा करता है। जिसका परिणाम टाइप 2 डायबिटीज, दिल एवं रक्त वाहिकाओं की बीमारियों के रूप में सामने आ सकता है।


3. जीन एवं पारिवारिक इतिहास – कुछ विशेष जीन मधुमेह की सम्भावना बढ़ा सकते हैं। जिन लोगों के परिवार में मधुमेह का इतिहास होता है, उनमें इस रोग की सम्भावना अधिक होती है।

मधुमेह के प्रकार – (Types of Diabetes) –

मधुमेह 2 प्रकार के होते हैं।
Type 1 – यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है, इसमें बीटा कोशिकाएं इंसुलिन नहीं बना पाती हैं। यह डायबिटीज़ बच्चों और युवाओं को होने की आशंका ज़्यादा होती है। मधुमेह के तकरीबन 10 फीसदी मामले इसी प्रकार के होते हैं।
Type 2 – इसमें शरीर में इंसुलिन की मात्रा कम हो जाती है या फिर शरीर सही तरीके से इंसुलिन का इस्तेमाल नहीं कर पाता।दुनिया भर में मधुमेह के 90 फीसदी मामले इसी प्रकार के हैं।
 गर्भावधि मधुमेह (Gestational diabetes) – यह मधुमेह गर्भावस्था के दौरान होता है, जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ जाती है। इस दौरान, गर्भवती महिलाओं को टाइप 2 डायबिटीज़ होने का खतरा ज़्यादा रहता है।

Types of Diabetes –
     Type 1 diabetes ( IDDM / Juvenile-Onset Diabetes ) is when the pancreas fails to produce the insulin which is essential for survival. This form develops most frequently in children and adolescents but is being increasingly noted later in life.

 Type 2 diabetes ( NIDDM ) results from the body’s inability to respond properly to the action of insulin produced by the pancreas. It occurs most frequently in adults but is being noted increasingly in adolescents as well. 

मधुमेह के लक्षण –

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             – बार-बार पेशाब लगना
             – लगातार शरीर में दर्द की शिकायत होना।
             – बार-बार त्वचा और प्राइवेट पार्ट्स में संक्रमण होना |
             – घाव का जल्दी न भरना।
             – गला सूखना या बार-बार प्यास लगना।
             – आंखों की रोशनी कमज़ोर होना।
             – वज़न का अचानक से ज़्यादा बढ़ना या कम होना।
             – लगातार थकान या कमज़ोरी महसूस होना।भरपूर नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही आपको ऐसा लगना कि आपकी नींद पूरी नहीं हुई है और शरीर थका हुआ है।
 – अचानक वज़न तेजी से कम होने लगता है। सामान्य दिनों की अपेक्षा आदमी का वजन एकाएक कम होने लगता है। 
               – डायबिटीज के मरीज का वजन तो कम होता है लेकिन भूख में बढोतरी भी होती है
              – व्यवहार में चिड़चिड़ापन होना ।

Symptoms –
– Increased Hunger
                  – Increased Thirst
                  – Weight Loss
                  – Frequent Urination
                  – Blurry Vision
                  – Extreme Fatigue
                  – Sores that don’t heal


Complications-
                High blood sugar damages organs and tissues throughout your body. The higher your blood sugar is and the longer you live with it, the greater your risk for complications.
– Heart disease, Heart attack, and Stroke
          – Neuropathy
          – Nephropathy
          – Retinopathy and vision loss
          – Hearing loss
          – Foot damage such as infections and sores that don’t heal
          – Skin conditions such as bacterial and fungal infections
          – Depression
          – Dementia

Test in Diabetes-
                 – Blood Sugar Level– Random, Fasting
                 – Cholesterol
                 – Blood Pressure
                 – Eyesight

मधुमेह से ऐसे बचें –

   1. नियमित व्यायाम करें – रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम मधुमेह से बचने के लिए आवश्यक है।

   2. संतुलित आहार –  सही समय पर सही आहार जैसे फलों, सब्जियों और अनाज का सेवन बेहद फायदेमंद है। लम्बे समय तक खाली पेट न रहें।
   3. वजन पर नियन्त्रण रखें – उचित आहार और नियमित व्यायाम द्वारा वजन पर नियंत्रण रखें।
   4. पर्याप्त नींद –  रोजना सात-आठ घंटे की नींद महत्वपूर्ण है। देर रात तक जागने और सुबह देर तक सोने से मधुमेह और उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ती है।
    5. तनाव से बचें – अपने आप को तनाव से दूर रखने की कोशिश करें। साथ ही तनाव के दौरान सिगरेट का सेवन करने से मधुमेह की सम्भावना और अधिक बढ़ जाती है।
 

आहार – विहार – 
पथ्य –
            करेला, मेथी, सहजन, पालक, तुरई, शलगम, बैंगन, परवल, लौकी, मूली, फूलगोभी, गाजर , टमाटर, बंद गोभी और पत्तेदार सब्जियाँ |
फलों में जामुन, नींबू, आंवला, टमाटर, पपीता, खरबूजा, कच्चा अमरूद, संतरा, मौसमी, जायफल, नाशपाती,एलोवेरा का रस |
 |
           बादाम, लहसुन, प्याज, अंकुरित दालें, अंकुरित छिलके वाला चना, सत्तू और बाजरा, नीम पत्र, दलिया, ग्रीन टी, अदरक, अंडे  |
   – गेहूं और जौ सामान मात्रा में लेकर आधी मात्रा  चने के साथ पिसवा लें। इस आटे की बनी चपातियां ही भोजन में खाएं।
    –  मेथी दाना रात को भिगो दें और सुबह प्रतिदिन खाली पेट उसे खाना चाहिए।
अपथ्य –
     –  आम, केला, सेब, खजूर तथा अंगूर 
     –  आलू, चावल और मक्खन 

Treatment-
   NOTE-
       – डायबिटीज के उपचार में लम्बे समय तक ली जाने वाली आधुनिक पद्ति की औषधियो से कभी कभी साइड इफ़ेक्ट स्वरुप किडनी खराब होना, लिवर व हृदय रोग आदि हो जाते है |  

–   आयुर्वेद औषधियाँ किसी भी रोग में बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के रोग को समूल से ठीक करती है | व  मरीज़ अपनी जीवनशैली और खानपान का ख्याल रखे तो डाइबिटीज़ को संतुलित रखा जा सकता है।

Note – आयुर्वेदिक उपचार के लिए या तो हमारे सेंटर पर संपर्क कर सकते है या फिर निचे दिए लिंक से ऑनलाइन आर्डर कर सकते है |

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डॉ. राकेश सैनी    Mob.- 9460935150,  www.ayurvedacareindia.com

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